
राहु काल वैदिक ज्योतिष में छाया ग्रह राहु द्वारा शासित एक अशुभ अवधि है। यह प्रतिदिन लगभग 90 मिनट के लिए होता है और नए कार्य शुरू करने, अनुबंध हस्ताक्षर करने या यात्रा आरंभ करने के लिए अशुभ माना जाता है।
राहु काल का समय सप्ताह के दिन के अनुसार बदलता है। सोमवार को यह सूर्योदय के बाद दूसरे, शनिवार को तीसरे, शुक्रवार को चौथे, बुधवार को पाँचवें, गुरुवार को छठे, मंगलवार को सातवें और रविवार को आठवें काल में आता है। सटीक समय आपके स्थान के सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है।
राहु काल में नए उद्यम शुरू करने, महत्वपूर्ण खरीदारी, पहली बार यात्रा या शुभ अनुष्ठान करने से बचना चाहिए। राहु काल शुरू होने से पहले चल रही गतिविधियाँ जारी रखना आमतौर पर स्वीकार्य माना जाता है। यह अवधि विशेष रूप से वित्तीय लेन-देन और कानूनी मामलों के लिए टाली जाती है।
राहु काल के पारंपरिक उपायों में राहु बीज मंत्र का जाप, भगवान शिव की प्रार्थना, और काले तिल या सरसों के तेल का दान शामिल है। उचित ज्योतिषीय परामर्श के बाद गोमेद रत्न धारण करना एक अन्य पारंपरिक उपाय है।
यदि राहु काल में महत्वपूर्ण कार्य करना ही पड़े, तो कुछ सावधानियाँ मदद कर सकती हैं। हनुमान चालीसा या दुर्गा कवच का पाठ आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है। दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके सरसों के तेल का दीपक जलाना एक अन्य पारंपरिक सुरक्षात्मक उपाय है।
आज का चोघड़िया आपके विशिष्ट स्थान के लिए चोघड़िया चार्ट के साथ राहु काल का समय एकीकृत दिखाता है। इससे अशुभ चोघड़िया काल और राहु काल दोनों से बचकर दिन की योजना बनाना आसान हो जाता है।
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Aaj Ka Choghadiya Editorial Team
Expert Verified · Published 10 मई 2025
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